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श्री विद्यां ध्यायेत्परामम्बिकाम्

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पाठ्यक्रम पूर्ण होने के बाद गुरूकुलम द्वारा परीक्षा आयोजित की जाती है जो सशुल्क होती है उसमे उत्तीर्ण होने पर प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है

 


अनुष्ठान केंद्र शिवालय श्री बाबा बिल्लेश्वर धाम माचलपुर


 

 
 
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ
        जय शंकर आप सभी भक्तो का हम श्री बिल्लेश्वर परिवार में स्वागत करते है, आइये हम आपको सबसे पहले मंदिर के इतिहास से परिचित करवाते है |यह अपनी पुरानी संस्कृति के लिए आज भी प्रसिद्ध है। घनी आबादी के बीच आज भी यहां पुरानी परंपराएं जीवंत हैं।
 
 
 
        शिवालय श्री बाबा बिल्लेश्वर धाम मध्यप्रदेश के अन्दर माचलपुर नगर में बड़ा तालाब के समीप स्थित है , यह मंदिर 500 वर्षो से भी अधिक प्राचीन है ,जहा कोरोना काल में मनुष्य जीवन महामारी की मार में था, उस समय आज के नए उम्र के मात्र 11 युवा बच्चो ने जिनकी उम्र मात्र 19 से 24 के ही बीच थी उन्होंने साहस कर मंदिर का जीर्णोद्धार किया और श्री बिल्लेश्वर मित्र मंडल समिति की स्थापना की और आज 1000 हजारो से अधिक लोग मंडल से जुड़ चुके है,समिति द्वारा समय समय पर भव्य आयोजन अभिषेक, यज्ञ, पूजन,अनुष्ठान होते रहते है |

ॐ धर्मो रक्षति रक्षितः

"धर्मो विश्वस्य जगतः प्रतिष्ठा" -:

इस श्रुति वचन के अनुसार धर्म ही सम्पूर्ण जगत् का आधार है। धर्म के आधार पर ही समस्त मानव समाज प्रतिष्ठित है । धर्म का लोप कोई भी नहीं कर सकता है। धर्म ने ही मानव समाज को एक सूत्र में बाँध रखा है। धर्म के बाह्यरूप भले ही भिन्न-भिन्न प्रकार के हो सकते है, परंतु सभी धर्मों का केंद्र भूत मूल तत्व एकमात्र परमात्मा का तत्व ही है, जिसको केंद्र मानकर समस्त धर्म प्रवृत हैं। सभी धर्म में अपनी-अपनी विशेषता होती है और कुछ आदर्श भी होते हैं। ठीक इसी प्रकार से हमारे हिंदू धर्म में भी कुछ विशेषताएं एवं आदर्श हैं। इनमें सभ्यता संस्कृति, रीति रिवाज, नीति नियम, वेशभूषा, रहन-सहन, भोजन भजन, पूजा पाठ, व्रत तथा त्यौहार आदि विशेष उल्लेख है।

इसी संदर्भ में यहां श्री विद्या गुरुकुलम्  सभी के कल्याण के लिए बनाया गया है ।

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